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मार्च, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एक ही बात को रिपीट पर चलाते रहना: हम ऐसा क्यों करते हैं और इससे कैसे निकलें

  एक ही बात को रिपीट पर चलाते रहना: हम ऐसा क्यों करते हैं और इससे कैसे निकलें क्या आपके दिमाग में कभी कोई बातचीत, आपसे हुई कोई गलती या फिर कोई सामाजिक घटना बार-बार रिपीट होती रहती है? बीते हुए लम्हों को बार-बार याद करना बहुत आम बात है। इसे अंग्रेज़ी में 'रूमिनेशन' कहते हैं। कभी-कभी कुछ बातों पर सोचना अच्छी बात है, ताकि हम आगे बढ़ सकें। लेकिन जब यही सोचने का सिलसिला लगातार चलता रहने लगता है और हमारे इमोशंस पर कब्ज़ा कर लेता है, तो यह रूमिनेशन एक समस्या बन जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि रूमिनेशन कैसे काम करता है, इसे बढ़ावा देने वाले मनोवैज्ञानिक कारण क्या हैं, और यह हम पर क्या बुरा असर डालता है। हम आपको इससे बाहर निकलने की कुछ शक्तिशाली तरकीबें भी सिखाएँगे, ताकि आप अपने दिमाग पर दोबारा से काबू पा सकें। रूमिनेशन का जाल: हम रिप्ले मोड में क्यों फंस जाते हैं रूमिनेशन के दौरान हम बीते हुए पलों, खासकर नकारात्मक अनुभवों को बार-बार अपने मन में घुमाते हैं। ज़्यादा सोच-विचार करने से अलग, रूमिनेशन के दौरान हम पछतावे, गुस्से, और खुद को दोष देने वाले इमोशंस पर फोकस करते हैं। आइए देखे...

मन में यह भ्रम क्यों होता है कि कोई आपको देख रहा है?

  मन में यह भ्रम क्यों होता है कि कोई आपको देख रहा है? हम सबने कभी न कभी इस अजीब सी परेशानी को महसूस किया है – आप सड़क पर चल रहे हो, और अचानक आपको लगने लगता है जैसे कोई आपको बिना रुके घूर रहा है। आपकी गर्दन पर चुभन सी महसूस होने लगती है। यह डर कुछ ऐसा होता है जो हमारी शांति को भंग कर देता है। यह लेख इसी अजीब अनुभव के पीछे के कारणों को समझाएगा और इससे निपटने के तरीकों के बारे में जानकारी देगा। आंखों का भ्रम: दिमाग की एक प्रतिक्रिया हमारा दिमाग हमारी रक्षा के लिए बना है। दिमाग का एक हिस्सा जिसका नाम है 'एमीगडाला', किसी भी खतरे की सूचना मिलते ही हमें 'लड़ो या भागो' जैसी प्रतिक्रियाओं के लिए तैयार करता है। यही कारण है कि हमें ऐसा लगने लगता है कि कोई हमें घूर रहा है, तो हम चिंतित और बेचैन हो जाते हैं। इस डर के पीछे और भी हैं कारण इस भ्रम के होने के कई कारण हो सकते हैं: सामाजिक चिंता (सोशल एंग्जायटी):  जिन लोगों को सामाजिक चिंता होती है, वे अक्सर दूसरों की नकारात्मक राय से बहुत डरते हैं। ऐसे लोगों को हल्की सी नजर भी घूरना जैसा प्रतीत हो सकता है, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ ...

अचानक घबराहट: क्या यह हमारी छठी इंद्रिय है?

  अचानक घबराहट: क्या यह हमारी छठी इंद्रिय है? क्या आपके साथ कभी ऐसा होता है कि आपको अचानक बैचैनी होने लगती है? आपका दिल तेज़ धड़कने लगता है, हाथों में पसीना आने लगता है और पेट में अजीब सी हलचल होने लगती है। यह डरावना एहसास, जिसमें आपके आसपास की हर चीज के बारे में आपकी जागरूकता बढ़ जाती है, बहुत आम है। पर इसका क्या मतलब है? क्या हमारा 'छठा ज्ञान' (sixth sense) हमें कोई चेतावनी देने की कोशिश कर रहा है? पांच ज्ञानेंद्रियों (दृष्टि, स्पर्श, स्वाद, गंध और श्रवण) से परे छठी इंद्रिय की अवधारणा ने सदियों से लोगों के मन में कौतुहल पैदा किया है। हालांकि वैज्ञानिक इस बात को अभी पूरी तरह नहीं मानते की कोई छठी इंद्रिय होती है, फिर भी कई प्रमाण हैं जो बताते हैं कि हमारा शरीर छोटी-छोटी बातों को पकड़ने और उन्हें अंतर्ज्ञान या सहज बोध में बदलने की अद्भुत क्षमता रखता है। यह लेख अचानक महसूस होने वाली घबराहट और हमारे अंतर्ज्ञान के बीच के संबंध को समझाने की कोशिश करता है। हम इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों, अवचेतन मन की शक्ति और इन रहस्यमय संकेतों को समझने की रणनीतियों के बारे में जानेंगे।...

ज़मीर की सुनो, बुढ़ापे में पछताओगे नहीं

  ज़मीर की सुनो, बुढ़ापे में पछताओगे नहीं हम सबके अंदर एक आवाज़ है – हमारा ज़मीर – जो सही-गलत का एहसास दिलाती है। इस आवाज़ को सुनना क्यों ज़रूरी है? इससे हमारी ज़िंदगी कैसे बेहतर बनती है? आइए समझते हैं। ज़मीर क्या होता है? दूसरों का दर्द समझना: हम किसी को तकलीफ नहीं देना चाहते क्योंकि हम उनका दर्द खुद महसूस कर पाते हैं। समाज से सीखी बातें: हमारे परिवार, धर्म, समाज के सही-गलत के उसूल भी हमारी सोच बनाते हैं। अपना दिमाग: हम सोच-समझकर फैसले करते हैं कि आगे चलकर इस काम का क्या असर होगा। दिल की बात: कभी-कभी हमें अंदर से ही पता चलता है कि कोई चीज़ गलत है, चाहे वजह साफ न भी हो। ज़मीर की सुनने के फायदे आत्म-सम्मान: जो दिल कहता है, उसे करने से खुद पर भरोसा बढ़ता है। मज़बूत रिश्ते: अच्छा बर्ताव करने से लोग हम पर विश्वास करते हैं और रिश्ते गहरे बनते हैं। बाद में पछतावा नहीं: बुरे काम न करके आगे चलकर मन को दुख नहीं होता। गलत रास्तों से बचाव: हमारा ज़मीर अक्सर हमें खतरे से पहले ही आगाह कर देता है। बचपन से सीखें बच्चों में सही-गलत की समझ ऐसे बढ़ाएं: दूसरों के बारे में सोचना सिखाएं: कहानियों और उ...